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Showing posts from January, 2025

Understanding people

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A clever and arrogant person

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Start the day with good thoughts

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So much for grief

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Trust in God

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Importance given after neglect

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Get away from rude people

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Respect for parents?

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Meditation of God

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A step in the right direction

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Time can never be reversed

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To be like a great man

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Good advisor

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The power of meditation on God

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A small step in the right direction.

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Time's turn

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Prayer for the rising star

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Don't cheat

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Over Smartness

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Your price

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Motivation from bad people

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Gymnasium

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The logic of age

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Bad thoughts about you

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The Mind

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Always smells good

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Prayer for the wrong person

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Human Habitation

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Fear ?

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रविदासिआ धरम की होंद कैसे, क्यों और कब हुई...?

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                     सतिगुरु रविदास महाराज जी जब इस धरती पर अवतार लेकर आए उन्हों ने जहाँ जातीवाद -धरम, ऊंच-नीच का बहुत सामना किया। गुरु जी ने यह जात - पात ऊच - नीच रोकने के लिए बहुत संघर्ष किया और अपनी बानी में इंसानियत का सन्देश दिया और हर प्राणी के बराबरी के हक़ की बात की। जो आज भी श्री गुरु ग्रन्थ साहिब और अमृतबानी में दर्ज है। उन्ही की बानी का एक शब्द :- ऐसा चाहु राज मैं जहाँ मिले सबन को अन्न।  शोट बड़े सब सम बसे रविदास रहे पर्सन।।                     इस शब्द से पता चलता है के उस वकत समाज में कैसे हालात होंगे और इतिहास से भी पता चलता कि तब मनुवाद का पूरा जोर था जो गरीब लोगों को शूदर का दर्जा देकर उनकी परशाई से भी नफरत करते थे। हालात ऐसे थे कि कोई गरीब ( दलित ) मंदिर के पास भजन भी सुन ले उनको सजा के तोर पर कानो में सिक्का ढाल के डाल दिया जाता था और उनके नाखुनो में सुइआ चुभोई जाती थी। उनको मंदर के पास से भी गुजरने का हक़ नहीं था। शुआ छूत का बहुत पसेरा था। अगर कोई दलित इनके कुएं...

क्या यह महामारी धरती को बचा रही है....?

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                     संन 2020 चल रहा है और शाअद ही इंसान इस साल को कभी भूल सके। पर इस से पहले भी ऐसी कई महामारी जैसी बीमारी ( फ्लू )आ चुकी हैं और कई तो तकरीबन ख़त्म हो चुकी हैं जैसे कि सवाइन फ्लू , एड्स , बर्ड फ्लू , चिकन गुनिआ , डेंगू जैसी कई महामारी जैसी बीमारी आ चुकी हैं। पर अब ऐसी बीमारी को देख कर मन में सवाल आने लगते हैं कि यह बीमारी कोई कुदरती आफत है जा फिर इंसान द्वारा ही बनाई गई जा जिसको इंसान के खात्मे के लिए बनाया गया है। बहुत से ऐसे सवाल मन में घर करते हैं। आज ऐसा ही एक मन का सवाल आपसे शायद आपके मन में भी आया होगा जिसको आपके सहमने रख रहा हूँ।                     थोड़ा सा दिमाग पर जोर देना पड़ेगा कि जब हमारी धरती का अविष्कार हुआ तब जहाँ धरती पर कोई भी जीवों की उत्पति नहीं हुई थी , ऐसे हमारी साइंस ( Science ) भी कहती है। हम धर्म ग्रंथो को छोड़ साइंस ( Science ) के आधार पे बात करते हैं। सोचिये जब धरती बनी होगी तभ उसका वजन कितना होगा और जो तब से लगातार ब्रह्माण्ड में चक्र लगा रह...

क्या इंसान सबसे सर्वश्रेष्ठ है...?

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                     इंसान खुद ही प्राचीन धर्म ग्रंथों में और आज भी अपने आप को बाकी जीवों के मुकाबले सर्वश्रेष्ठ मानता आ रहा है क्या इंसान सच में सर्वश्रेष्ठ है जा इस ब्रह्मांड में कोई और भी इंसान से ज्यादा सबसे सर्वश्रेष्ठ है ? अगर इन बातों को सोचने लग जाओ तो कई सवाल उत्पन्न होते हैं। बाकी जीवों को देखकर कभी-कभी ऐसा लगता है कि इंसान सर्वश्रेष्ठ होने की बजाए यह सिर्फ एक दूसरों जीवो का कातिल बन गया है। यही इंसान की वजह से इस धरती पर कई जीवन जातियां खत्म हो चुकी हैं और हो रही है। यह इंसान तो खुद ही इंसान का दुश्मन भी बन चुका है और ऐसा आप सब ने खुद इतिहास के पन्नों में भी पढ़ा होगा और आज भी आप लोग यह सब देख रहे होंगे ।                     हजारों सालों से इंसान धर्मों को लेकर एक दूसरे को काट रहा है लड़ रहा है और आज तक धर्मों की इस लड़ाई से इंसान बाहर नहीं निकल पाया कहीं धर्मगुरु आए और इस धर्म लड़ाई को खत्म करने के लिए उन्होंने लोगों को अपने-अपने वाणी से जागरूक किया पर यह इंसान उनको गुर...

पैसा और मजबूरी

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           आज मैं बहुत खुश था क्योंकि इंग्लैंड से आया मेरा दोस्त अपने किसी काम से शहर आ रहा था और उसने मुझे मिलने के लिए शहर आने के लिए बुलाया और एक ट्रैवल एजेंट से 15 मिनट में आने के लिए कहा और कहा कि वह भी वही मिल रहा है। ठीक 15 मिनट मैं मैंने बारिश में राहगीरों से लिफ्ट ली और उसी जगह पहुंच गया । वहां पहुंचने के लिए ऑटो भी थे लेकिन मुझे पूरा महीना ₹600 में निकालना था क्योंकि मेरे पास ₹600 रुपए बचे थे और 1 महीने के लिए इतने रुपए बहुत कम थे। हम लगभग 1 साल के बाद इकट्ठे हुए थे। हम एक दूसरे का हालचाल पूछा और एजेंट के पास बैठ गए।             मेरे दोस्त के पिता जी के स्वर्गवास होने के बाद उसकी माता जी भारत में अकेली रह रही हैं। हमें उनके पेपर एजेंट के पास जमा कराने थे और 1 - 2 पेपर फिर दूसरे शहर लेकर जाने थे जिसमें एक दो गलतीयां थी।             मेरे दोस्त का एक और दोस्त उसको भी हमने मिलना था। उसको मिलने के लिए हम जहां मेरे दोस्त की गाड़ी खड़ी थी वहां के लिए रिक्शा में सवार हो निकल गए ओर गाड़ी उठा कर दू...

बेटिओं की लोहड़ी - बदलता समाज

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     लोहड़ी का त्यौहार सदियों से मनाया जाता आ रहा है और पंजाब में सबसे लोकप्रिय त्यौहार में से एक है। इस त्यौहार की उत्पत्ति कई ऐतिहासिक और परिमाणिक लोक कथाओं मैं हुई है और सबसे लोकप्रिय हैं दुल्ला भट्टी की कहानी जो एक डाकू होने के बावजूद गरीब लोगों की बेटियों को अपनी बेटियों के रूप में शादी करता था। और दुल्ला भट्टी ने पहली दो लड़कियां सुंदरी मुंद्री जो गरीब पिता की बेटियां थी जिनके सुंदर गीत सुंदर मुंद्रीय आज भी लोकप्रिय हैं और लोहड़ी पर गाया जाता है। दुल्ला भट्टी में लड़कियों की शादी करा कर समाज को एक बहुत अच्छा संदेश दिया है कि बेटियों को अपने सिर का ताज बनाकर रखें। यह लोहड़ी का गीत बहुत लोकप्रिय हैं :- सूंदर मुंदरिये ...... हो तेरा कौन विचारा ...... हो दुल्ला भट्टी वाला ....... हो दुल्ले धी विआही ....... हो  शेर शकर पाई ....... हो  कुड़ी दा लाल पटाका ....... हो  कुड़ी दा शालू पाटा ....... हो  शालू कोंन समेटे .......हो  चाचे चूरी कुटी .......हो  जिमींदारा लुटी ...

चाइना डोर ( बसंत पंचमी पर विशेष)

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       बसंत पंचमी का त्यौहार आने वाला है और बच्चों बड़ों में इस त्यौहार को लेकर बहुत उत्साह होता है और दुकान वाले भी इस त्योहार को लेकर पूरे सर गर्म होते है। बसंत पंचमी के दिन लोग बड़े शौक से खासतौर पर बच्चे इस दिन को बड़े खुश होकर आसमान में पतंग उड़ा कर मनाते हैं।        अक्सर आप लोगों ने अखबारों में या सोशल मीडिया पर चाइना डोर से हो रहे हैं नुकसान के बारे में पढ़ते होंगे और आप लोगों ने कई दुखदाई घटनाएं भी पढ़ी होंगी। इसमें से ज्यादा घटनाएं चाइना डोर से होती हैं।        आज हम चाइना डोर के बारे में ही बात करेंगे कि चाइना डोर क्या है और इससे होने वाले नुकसान से कैसे बचा जाए। चाइना डोर का नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यह धागा चाइना से ही बनकर आता है जिसमें से प्लास्टिक या फाइबर मिक्स होती है और यह धागा बहुत मुश्किल से टूटता है उन्होंने इस में जैसे कि बिजली कार्यशील जैसी धातु प्रयोग की होती हैं जो कि आसानी से टूट ना पाए। हमारे बच्चे या बड़े चाइना डोर का इस्तेमाल इसलिए करते हैं कि उनकी पतंग आसानी से कट ना सके। पर हम इसके नुकसान को जानते...

पानी का हो रहा है दुरुपयोग कौन है जिम्मेदार...? Water Wastage who's responsible...?

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     आपने मेरे पिछले आर्टिकल में भारतीय लोगों की सड़कों पर मानसिकता के बारे में पढ़ा होगा।        आज मैं इस आर्टिकल मैं उस कुदरती स्रोत के बारे में बात करूंगा जिसके बिना जीवन असंभव है। आज हम इस स्रोत की वैल्यू नहीं समझ पा रहे हैं पर कल हम इस से हाथ धो बैठे गे ऐसा आने वाले समय में हो रहा है। उस स्रोत का नाम है पानी। आप समझ ही गए होंगे कि मैं आज क्या कहने जा रहा हूं पर आप यह नहीं जानते के पानी कहांं-कहां दुरुपयोग हो रहा है और इसे रोकने के लिए हमें क्या-क्या करना पड़ेगा...?        हम सब अपने बच्चों को इतना प्यार करते हैं कि वह जरा सा भी बीमार हो जाएं तो हमारी जान पे बन जाती है और आप सोचिए कि उन्हीं बच्चों को कल पानी के लिए तरसना पड़ जाए तो फिर आप पर क्या बीतेगी क्या आप समझ रहे हैं कि मैं क्या करना चाहता हूं? हां बिल्कुल सही धरती में पानी का जो लेबल है वह बहुत नीचे जा रहा है और जो बड़े बोरवेल है आने वाले समय में वह भी धरती से पानी निकालने में असमर्थ हो जायेंगे।        आइए जानते हैं कि हम कहां-कहां पानी जाया करत...

भारतीय लोगों की सड़कों पर दुर्दशा - भाग 1

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       मेरा भारत देश महान ज्यादातर 26 जनवरी और 15 अगस्त को हर किसी की जुबान पर यह नाहरा होता है पर जब हम खुद समाज के बीच गुजरते हैं तो फिर हम भारत देश को भूलकर हम स्वार्थी हो जाते हैं भूल जाते हैं कि हम जिस देश को महान कह रहे हैं वह देश हम लोगों से ही बनता है। ऐसी कई उदाहरण हैं जो मैं आज आपके सामने रख रहा हूं जिस पर आपको खुद अहसास होगा कि जिस देश को हम भारत महान देश कहते हैं वो सिर्फ एक नक्शा नहीं है वह हम लोगों से ही बनता है क्या हम महान है...?        बात में राजनीतिक और धार्मिकता से हटकर अपने सामाजिक कुरीतियों के ऊपर करूंगा जैसे कि हम लोग समाज में एक दूसरे के प्रति अपना क्या फर्ज निभा रहे हैं...? और खास बात सड़कों की आवाजाही की करूंगा और सड़कों पर चल रहे हैं भारतीय लोगों की मानसिकता की करुंगा।        बीसवीं सदी चल रही है लोग बहुत एडवांस हो चुके हैं हर आदमी तरक्की के रास्ते पर हैं हर कोई एक दूसरे से आगे निकलने की दौड़ में है यह बहुत अच्छी बात है पर लोग अपनी इस भाग दौड़ में इतने मकबूल हो गए है कि वह दूसरों की परवाह करना भूल गए...